जुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई..तोल मोल के बोल, वरना खुल जाती है पोल!

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दोबारा कांग्रेस की सरकार बनी
तो मैं अपना कान काट लूंगा

 – दिनेश कश्यप (पूर्व सांसद) – 

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नाक तो पहले ही कट चुकी है अब
कान कटवाने के लिए तैयार रहें।

– सांसद व कांग्रेस नेता दीपक बैज

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कान सलामत रहता है या अब की बार
कांग्रेस की नाक कटने की नौबत आती है
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  • जगदलपुर(वरिष्ठ प्राकारअर्जुन झा की कलम से)
  • बस्तर के राजनीतिक दिग्गज बलीराम कश्यप की सियासी विरासत सम्हालते हुए बस्तर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके दिनेश कश्यप और मौजूदा सांसद दीपक बैज के बीच का सियासी संवाद बस्तर में धूम मचा रहा है। पार्टी की बैठक में पूर्व सांसद दिनेश कश्यप ने कह दिया कि प्रदेश में अगर दोबारा कांग्रेस की सरकार बनी तो मैं अपना कान काट लूंगा। जवाब में बस्तर सांसद और कांग्रेस नेता दीपक बैज ने मोर्चा खोलते हुए कह दिया कि नाक तो पहले ही कट चुकी है। पंद्रह साल तक राज करने के बाद भाजपा को सिर्फ पंद्रह विधायक मिले। अब कान कटवाने के लिए तैयार रहें।
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  • दरअसल बस्तर भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और बस्तर संभाग प्रभारी शिवरतन शर्मा शामिल हुए। बैठक शुरू होने से पहले पूर्व सांसद दिनेश कश्यप ने राज्य सरकार पर कांग्रेस सरकार के आधे गुजर चुके  कार्यकाल को लेकर हमला बोलते हुए कह दिया कि पिछले ढाई सालों में सरकार ने केवल लूटमार का काम किया है। एक भी विकास कार्य नहीं हुआ। भूपेश बघेल सरकार पर बरसते हुए पूर्व सांसद दिनेश कश्यप ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने ढाई साल के कार्यकाल में एक भी जन कल्याणकारी योजना नहीं बनाई है. किसानों के साथ-साथ प्रदेश के बेरोजगार युवा, आम जनता और शासकीय कर्मचारी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
  • कांग्रेसियों ने जिस तरह से गंगाजल हाथ में रखकर शराबबंदी और युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने की कसम खाई थी, वह सभी कसमें ढकोसला साबित हुई है। कांग्रेस चुनावी वायदे भूल गई। बस्तर के साथ-साथ पूरे प्रदेश के किसान त्रस्त हैं। कांग्रेस की सरकार अब दोबारा प्रदेश में नहीं आने वाली। यदि अगले चुनाव में कांग्रेस की सरकार दोबारा बनती है तो मैं अपना कान काट लूंगा। जब दिनेश के ऐसे बोल दीपक के कानों तक पहुंचे तो उन्होंने भी भाजपा की खुली हुई पोल खोलने में कोई कंजूसी नहीं की।
  • उन्होंने वह सब कुछ कह दिया, जो उनसे कांग्रेसियों को अपेक्षित था। राजनीति में बोलने और सुनने की आदत डालना चाहिए। बोलोगे तो सुनने भी मिलेगा और सुनोगे तो बोलने में और धार आयेगी। बोलने के मामले में दिनेश और दीपक सही टक्कर के प्रतिद्वंद्वी हैं। कोई किसी से कम नहीं। दिनेश कांग्रेस की राज्य सरकार पर निशाना साधते हैं तो दीपक छत्तीसगढ़ से जुड़े मामलों को लेकर भाजपा की केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जुबानी हमला करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नीतियों की पैरोकारी बड़ी दमदारी से करते हैं।
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  • दीपक बैज पहले विधायक की हैसियत से छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा सरकार को जमकर घेरते थे। अब बस्तर सांसद के रूप में संसद में बस्तर और छत्तीसगढ़ की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। दिनेश जब सांसद थे तब मोदी की पहली सरकार के समय संसद में उनके तीखे तेवरों का सवाल ही नहीं उठता था। राज्य में भी भाजपा की सरकार थी। लिहाजा वे केवल सकारात्मक ऊर्जा प्रदर्शित किया करते थे। अब विपक्षी दल के नेता के तौर पर वह आक्रामक तरीके से राज्य सरकार पर हमला बोलते हैं लेकिन दीपक उन्हें आइना दिखा देते हैं।
  • राजनीति के गलियारों में अक्सर यह बात चलती है कि अगर भाजपा ने लोकसभा चुनाव में सारे तत्कालीन सांसदों की टिकट काटने का फार्मूला नहीं आजमाया होता तो मुकाबला दिनेश और दीपक के बीच होता। बस्तर से भाजपा ने दिनेश की टिकट काटकर बैदूराम कश्यप को टिकट दी थी, जिन्हें दीपक बैज ने पराजित कर दिया। दिनेश अपराजित हैं, इसलिए अगले लोकसभा चुनाव में उनकी दावेदारी सशक्त है। कदाचित इसका अंदाजा दीपक को भी है। इसलिए वे दिनेश के सियासी हमले पर तीखा जवाब दे रहे हैं। अन्यथा राज्य सरकार पर साधे गए निशाने का जवाब देने के लिए बस्तर में मंत्री कवासी लखमा सहित पूरे बारह विधायक मौजूद हैं।
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  • बस्तर में भाजपा का पूरी तरह सफाया हो चुका है। अब कांग्रेस सरकार का आधा कार्यकाल गुजर जाने के बाद भाजपा बस्तर में नए सिरे से जमीन तलाश रही है। चलिए आगे देखते हैं कि दिनेश कश्यप का कान सलामत रहता है या अब की बार कांग्रेस की नाक कटने की नौबत आती है।

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