कोरोना की नई दवा : भारत में ‘एंटीबॉडी कॉकटेल’ से होगा कोरोना मरीजों का इलाज

कोरोना की नई दवा : भारत में ‘एंटीबॉडी कॉकटेल’ से होगा कोरोना मरीजों का इलाज Pradakshina Consulting PVT LTD Support Us

भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की

मिली इसे मंजूरी

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जानें स्विस कंपनी Roche की

इस दवा के बारे में सब कुछ

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  • नई दिल्ली/वेब डेस्क
  • एंटीबॉडी कॉकटेल, यानी दो ऐसी एंटीबॉडी का मिश्रण, जो किसी वायरस पर एक जैसा असर करती हो. इस कॉकटेल एंटीबॉडी दवा में कोरोना वायरस पर समान असर करने वाली एंटीबॉडीज का मिश्रण है।
  • कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत में तीसरी लहर की भी संभावना जताई जा रही है. ​सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ शेखर मांडे और दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के बाद देश के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन ने भी कह दिया है कि कोरोना की तीसरी लहर जरूर आएगी. इस बीच कुछ अच्छी खबरें भी सामने आ रही हैं. देश में कोरोना की रिकवरी रेट सुधरी है और हर दिन पहले की अपेक्षा ज्यादा फीसदी लोग इससे ठीक हो रहे हैं.
  • एक और अच्छी खबर यह है कि देश की शीर्ष दवा नियामक सीडीएससीओ यानी केंद्रीय ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (Central Drugs Standards Control Organisation) ने एंटीबॉडी-ड्रग कॉकटेल को मंजूरी दे दी है, जो कोरोना महामारी से जंग में बड़ा हथियार साबित हो सकती है. एंटीबॉडी-ड्रग कॉकटेल Casirivimab और Imdevimab को फिलहाल इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है.
  • यह दवा क्या है, कैसे काम करती है, किस आधार पर मंजूरी दी गई, यह किस स्तर के कोरोना मरीजों के लिए कारगर है, भारत में यह कैसे उपलब्ध कराई जाएगी… ऐसे तमाम सवालों के जवाब यहां बताए जा रहे हैं.

ये दवा है क्या, किसने बनाया?

  • इस दवा को एक यौगिक या मिश्रण कहा जा सकता है. यह एक एंटीबॉडी कॉकटेल है. एंटीबॉडी कॉकटेल, यानी दो ऐसी एंटीबॉडी का मिश्रण, जो किसी वायरस पर एक जैसा असर करती हो. एंटीबॉडी-ड्रग कॉकटेल Casirivimab और Imdevimab को स्विस कंपनी Roche ने Regeneron के साथ मिलकर विकसित किया है. इस कॉकटेल एंटीबॉडी दवा में कोरोना वायरस पर समान असर करने वाली एंटीबॉडीज का मिश्रण है. रोशे के इसी एंटीबॉडी कॉकटेल को देश में मंजूरी दी गई है.

मोनोक्लोनल

एंटीबॉडी आधारित है दवा

  • यह कॉकटेल दवा मोनोक्लोनल एंटीबॉडी आधारित है. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी लैब निर्मित प्रोटीन होते हैं जो वायरस या अन्य हानिकारक रोगजनकों से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम की क्षमता की कॉपी करते हैं. Casirivimab और Imdevimab मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है, जो खास तौर से SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ कारगर होते हैं. ये वायरस को ह्यूमन सेल्स यानी मानव कोशिकाओं में प्रवेश को रोकने के लिए तैयार किए गए हैं.

किस आधार पर मिली मंजूरी?

  • स्विटजरलैंड की कंपनी Roche ने कहा है कि भारत में Casirivimab और Imdevimab की मंजूरी अमेरिका और यूरोपीय यूनियन में इमरजेंसी यूज के लिए दायर किए गए आंकड़ों के आधार पर दी गई है. बता दें कि हाल ही में कोरोना की भयावह होती स्थिति में केंद्र सरकार ने ऐसा प्रावधान किया है कि भारत से बाहर विदेशों में हुए ट्रायल डेटा के आधार पर भी देश में मंजूरी के लिए आवेदन किया जा सकता है.

किस तरह के मरीजों पर

काम करेगी दवा?

  • इस एंटीबॉडी कॉकटेल को वयस्कों और 12 वर्ष या उससे अधिक आयु बाल रोगियों (कम से कम 40 किलोग्राम वजन वाले) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनमें हल्के से मध्यम लक्षण हों, जिनमें SARS-COV-2 से संक्रमित होने की पुष्टि हो जाती है और गंभीर संक्रमण का खतरा हो. Roche और Regeneron की ओर से बनाई गई कॉकटेल दवा Casirivima और Imdevimab इसमें कारगर हो सकती है.

मरीजों की हालत

बिगड़ने से बचाएगी दवा

  • रोशे इंडिया के एमडी वी सिम्पसन एमैनुएल का कहना है कि हम भारत में मरीजों के हॉस्पिटलाइजेशन और हेल्थकेयर सिस्टम से प्रेशर कम करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. एंटीबॉडी कॉकटेल Casirivimab और Imdevimab कोरोना मरीजों की स्थिति बिगड़ने से पहले इलाज में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
  • हल्के और मध्यम लक्षण वाले जिन मरीजों में गंभीर संक्रमण की संभावना दिखेगी, डॉक्टर उनके लिए इस दवा का इस्तेमाल कर सकेंगे. यह दवा उन मरीजों की स्थिति बिगड़ने नहीं देगी. जिस तेजी से देश में कोरोना मरीजों की स्थिति संक्रमण के कुछेक दिनों के अंदर गंभीर स्थिति हो जा रही है, ऐसे में उन मरीजों की स्थिति बिगड़ने से यह दवा बचाएगी.

भारत में कैसे

उपलब्ध होगी यह दवा?

  • रोशे की इस एंटीबॉडी कॉकटेल के मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का अधिकार भारत में दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला (Cipla Ltd) के पास है. भारत में मंजूरी मिलने के बाद इसे आसानी से आयात किया जा सकेगा. सिप्ला के MD और ग्लोबल CEO उमंग वोहरा का कहना है कि हम कोरोना के इलाज के लिए सभी संभावित विकल्पों की खोज करने के लिए समर्पित हैं. यह इलाज देश में वैक्सीनेशन के साथ-साथ चलेगा और भारत में महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई का समर्थन करेगा.
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