जैन संवेदना ट्रस्ट ने विद्यार्थियों और स्कूल प्राचार्यों से की विनम्र अपील

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गत वर्ष की पाठ्यपुस्तकों का

विद्यार्थी करें आदान-प्रदान

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कोरोनाकाल में पर्यावरण

संरक्षण की भी होगी मदद

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  • रायपुर/एक्ट इंडिया न्यूज
  • वैश्विक महामारी कोरोना की आपदा ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया. इस महामारी ने अनेक परिवारों से कमाऊ मुखिया छीन लिया तो बहुतेरे परिवारों के समक्ष घोर आर्थिक संकट की स्थिति पैदा कर दी. इस आपदा काल के बीच ही बच्चों का शिक्षण सत्र भी अब प्रारंभ होने जा रहा है. और बच्चों की शिक्षा पर किया जाने वाला खर्च अब मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी पड़ने वाला है।
  • ऐसी परिस्थिति में जैन संवेदना ट्रस्ट ने सभी विद्यार्थियों से उत्तीर्ण की हुई कक्षा की किताबें, नोट्स आदि पाठ्यसामग्री इस वर्ष उस कक्षा में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को प्रदान करने और स्वयं भी अगली कक्षा की पुरानी पुस्तकें, पाठ्य सामग्री इसी तरह एक-दूसरे से प्राप्त करने की विनम्र अपील की है।
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  • जैन संवेदना ट्रस्ट के महेंद्र कोचर, विजय चोपड़ा, कमल भंसाली ने कहा है कि इस प्रकार पिछले वर्ष की पुस्तकों, पाठ्यसामग्री के आदान-प्रदान से अभिभावकों, पालकों को इस अर्थ संकट की घड़ी में राहत होगी. उन्होंने सभी स्कूलों के प्राचार्यों, प्रधान अध्यापकों को पत्र लिखकर इस आशय की विनम्र अपील करते हुए कहा है कि वे भी इस हितकारी कार्य के लिए आगे आकर स्कूल में विद्यार्थियों से प्राप्त पुरानी पुस्तकों का अस्थायी भंडार गृह में पुस्तकालय प्रणाली में संग्रहण कर उनके आदान-प्रदान में विद्यार्थियों को सहयोग प्रदान करें।
  • इससे विद्यार्थी पुरानी पाठ्यसामग्री प्राप्त करने के लिए भटकने से बच जाएंगे और उन्हें उनके ही स्कूल में व्यवस्थित कक्षावार पुरानी पुस्तकें उपलब्ध हो सकेंगी। यह एक ऐसी पहल है कि इसका अनुशरण करते हुए प्रत्येक समाज व परिवारों को ध्यान देते हुए इस पर अमल करना चाहिए।
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  • जैन संवेदना ट्रस्ट के महेन्द्र कोचर, राजेश जैन, महावीर कोचर ने कहा कि इस प्रकार धन के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा। पुस्तकों व नोटबुक में पेपर का बहुतायत उपयोग होता है जिसके लिए वृक्षों को काटना ही पड़ता है। इस प्रकार हम पर्यावरण की भी मदद कर सकते हैं।

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