खेल जगत : करोड़ों का स्टेडियम बना धर्मशाला

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खेल के स्टेडियम में हो रहा

राजनीति का खेल हावी

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एक्ट इंडिया न्यूज के

सम्पादक एवम वरिष्ठ पत्रकार

अमित गौतम की कलम से

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  • राजनांदगांव/भाजपा की रमन सरकार ने राजनांदगांव में खेल प्रतिभा को देखते हुए 57 करोड़ की स्वीकृति देते हुए नया स्टेडियम बनवाया ।स्टेडियम बनने के बाद हुए चुनाव में सत्ता परिवर्तन में कांग्रेस की सरकार आई 57 करोड़ के स्टेडियम में खेल कम राजनीति का खेल ज्यादा हावी है।

सुरक्षा व्यवस्था शून्य

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  • स्टेडियम में ना ही कोई सुरक्षा व्यवस्था है ना ही कोई सिस्टम काम कर रहा। स्टेडियम की सुरक्षा के नाम पर गेट में कोई गार्ड नहीं आने-जाने वालों पर कोई रोक टोक नहीं, असामाजिक तत्वों का डेरा लगातार बना रहता है रात में शराबियों और गांजा पीने वालों का अड्डा भी। यहाँ तक 57 करोड़ के स्टेडियम में लोग अपना कुत्ता भी घुमाने बेरोकटोक लेकर आते हैं। राजनांदगांव नक्सल प्रभावित जिला है अगर कोई स्टेडियम में बम प्लांट करके चला जाये और भविष्य में मैच के दौरान विस्फोटक करके भारी जान माल का नुकसान हो ये भी संभव है।

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  • वर्तमान में स्टेडियम में हर तरह का खेल बेरोकटोक जारी है सारे बड़े और छुटभैये लोगों की मनमर्जी चल रही सब अपना सिक्का इस व्हाइट हाउस में जमाना चाहते हैं, लेकिन सिस्टम की बात कोई भी नहीं कर रहा…. देखा जाए तो केवल विपरीत परिस्थितियों में साईं ट्रेनिंग सेंटर के द्वारा बास्केटबॉल का खेल सही तरीके से जारी है।
  • रिजल्ट की अगर बात करें तो आज तक जितने भी खेल राजनांदगांव जिले में खेले जाते हैं उसमें सबसे अच्छा रिजल्ट अगर देखा जाए तो केवल और केवल बास्केटबॉल का है जबकि जिलेवासियों के दिमाग में हाँकी का खेल जरूर था लेकिन कागज में जब रिजल्ट की तुलना करें तो 5 पेज से ज्यादा नाम जिले से नहीं लिखे जा सकते। वर्तमान स्थिति में स्टेडियम का बिजली बिल तक पटाने की क्षमता नही है, स्टेडियम पूरी तरह अंधेरे में डूब चुका है।

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आज की परिस्थिति यह हेै कि सभी खेल संघ अपने-अपने स्तर से स्टेडियम परिसर में कमरा पाने के लिए जोर आजमाइश कर रहे है।
  • यूं तो सभी संघो का अपना कार्यालय है भी की नही पर अनुदान सरकार से जरूर ले रहे है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दो संघो को कोविड काल मे भी पर्याप्त अनुदान दिया गया है जबकि उनकी खेल गतिविधियों का कोई अतापता तक नहीं है।
  • राजनांदगांव स्टेडियम में प्रोफेशनलिज्म की कमी है सभी राजनीति करके हर खेल मुफ़्त में खेलना चाहते है भले ही कराटे क्लास, ड्राइंग क्लास की फीस देकर बाहर से अच्छी ट्रेनिंग ले लेंगे लेकिन जहां बात स्टेडियम में खेलने की होगी तो सब कुछ मुफ़्त पाना चाहते है।
वर्तमान स्थिति यह है कि खेल संघों के माध्यम से राजनीति का खेल अपने फ़ाइनल मैच में पहुँच चुका है।
  • स्टेडियम की वर्तमान समस्याओं और खामियों को लेकर इस दिशा में वर्तमान संवेदनशील कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा को उचित निर्णय लेने की आवश्यकता है कि व्यापक स्तर पर स्टेडियम के रख रखाव के लिए एक एक्सपर्ट की कमेटी गठित करें मेन गेट में गार्ड हो साथ ही आने जाने वाले हर खिलाड़ी के पास गेट पास हो या खिलाड़ी को अधिकृत आई कार्ड जारी किया जा सके।
  • जो भी व्यक्ति तन मन धन लगाकर पूरी निष्ठा से स्टेडियम के लिए कार्य करना चाहता है  उस पर राजनीति हावी हो जाती है। यही कारण है कि 57 करोड़ का स्टेडियम आज उचित व्यवस्था के अभाव में गर्त की ओर जा रहा है।

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