वेबिनार का हुआ आयोजन : ग्रामीण क्षेत्रों के पारिस्थितिक तंत्र के पुनर्बहाली पर हुआ विचार – डॉ पूर्णिमा शुक्ला

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यूज एण्ड थ्रो के कल्चर को छोड़कर

यूज एण्ड ग्रो के कल्चर पर करें काम

 – प्रसन्न कुमार

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  • रायपुर/एक्ट इंडिया न्यूज
  • छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद के पांचवी संगोष्ठी, कोरोना की बाध्यता के कारण आज यह संगोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन वेबीनार के माध्यम से हुआ। परिषद का गठन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के भूगोल विद्वतजन के विचारों के आदान प्रदान हेतु शोध एवं अध्ययन अध्यापन पर चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करना है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ पर किसी न किसी उच्च शिक्षा संस्थान के सहयोग से प्रतिवर्ष संपन्न होता है।
  • वर्तमान में दुर्गा महाविद्यालय रायपुर एवं सी.एम. डी. महाविद्यालय बिलासपुर के सहयोग से आयोजित किया गया है वेबीनार की समन्वयक डॉ पूर्णिमा शुक्ला तथा सह संयोजक डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर है उसका विषय ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली है विषय का चयन इसलिए किया गया है कि इस दशक को पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली की दशक घोषित किया छत्तीसगढ़ ग्रामीण प्रधान प्रदेश और पिछले दशकों में गांव के आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य में बढ़ती हुई दर से परिवर्तन हुए हैं अतः इन पर चर्चा करना अत्यंत महत्वपूर्ण या समीचीन समझा गया है।

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  • इस वेबिनार में वक्ता के रूप में देश के दो प्रतिष्ठित विद्वान दो के व्याख्यान हुए प्रसन्न कुमार महात्मा गांधी शिक्षा परिषद महात्मा गांधी ग्रामीण शिक्षा परिषद के चेयरमैन है मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए ग्रामीण विकास और केंद्रों से जुड़े हुए हैं एवं राज्य शासन के विभिन्न समितियों से जुड़े हुए हैं। प्रसन्न कुमार का कहना है कि वी विल वर्क फार अवर एनवायरमेंट, वी विल नाॅट लीव इन ग्रीड कल्चर – वी वील लिव इन नीड कल्चर और उन्होंने कहा ग्रीन कल्चर की बात करें, यूज एण्ड थ्रो के कल्चर को छोड़कर यूज एण्ड ग्रो के कल्चर पर काम करें।
  • विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रोफेसर एस के मेहरोत्रा इलाहबाद विश्वविद्यालय में प्राणी विज्ञान के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हैं और जिन्होंने पारिस्थितिक तंत्र पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किया है प्रोफेसर एस के मेहरोत्रा ने अपने व्याख्यान में लैम्ब रिस्टोरेशन, वाॅटर रिस्टोरेशन एवं ईकोसिस्टम रिस्टोरेशन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए भारत और विदेश का उदाहरण देते हुए विचार व्यक्त किए।
  • इस आयोजन में एच एस गुप्ता संरक्षक छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद ने कहा कि भूगोल में सब है भूगोल का अपना दृष्टिकोण स्पेस है भूगोल क्षेत्रीय विविधता को प्रस्तुत करता है और आपने शोधकर्ताओं को मेसेज दिया कि हमें क्षेत्र से जुड़कर काम करना है।

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  • सागर विश्वविद्यालय से डॉ संतोष शुक्ला ने भूगोल विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तथ्यों का विश्लेषण करने पर ही परिणाम आयेंग।
  • डॉ मधु कामरा प्राचार्य दुर्गा महाविद्यालय रायपुर एवं डॉ संजय सिंह प्राचार्य सी एम डी महाविद्यालय बिलासपुर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद के उद्देश्यों पर परिषद के अध्यक्ष टी.एल. वर्मा ने प्रकाश डाला और डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकार विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग सी एम डी महाविद्यालय ने अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
संचालन डॉ पूर्णिमा शुक्ला छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद की सचिव एवं विभाग अध्यक्ष भूगोल विभाग दुर्गा महाविद्यालय रायपुर ने किया।
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