छत्तीसगढ़

व्यापार जगत : एक अप्रैल 2026 से लागू प्रमुख कर परिवर्तन, संक्षिप्त बिंदुवार विवरण :  CA चेतन तारवानी

  • छतीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के वाईस चेयरमेन सीए चेतन तरवानी ने बताया एक अप्रैल 2026 से लागू प्रमुख कर परिवर्तन – संक्षिप्त बिंदुवार विवरण इस प्रकार है

अप्रत्यक्ष कर

(GST – व्यापार से जुड़े नियम)

  • बिल की नई शुरुआत (New Invoice Series): नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही व्यापारियों को अपनी बिल बुक (Invoice) की नंबरिंग  दोबारा शुरू करनी होगी। पुराने नंबरों को जारी रखना नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
  • ई इनवॉइस बिल अनिवार्य (E-Invoicing): अगर वित्तीय वर्ष 25-26 में टर्नओवर ₹5 करोड़ से अधिक हुआ है तो  एक अप्रेल से  e-invoicing अनिवार्य है, बिना IRN(पोर्टल से approve किया हुआ invoice) invoice अमान्य होगा । हर बिल सरकारी पोर्टल (E-Invoicing) के जरिए बनाना होगा,
  • रिटर्न भरने की योजना (QRMP Scheme): छोटे व्यापारियों  के लिए ‘महीने में टैक्स और तीन महीने में एक बार फॉर्म’ भरने की योजना चुनने या उससे बाहर निकलने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल 2026 है,।

TCS (Tax Collected at Source)

  • Liquor, Scrap, Minerals पर TCS: इन वस्तुओं पर TCS दर 1% से बढ़ाकर 2% कर दी गई है, जिससे collection दायित्व बढ़ेगा।
  • Tendu Leaves पर TCS: तेंदू पत्तों पर TCS दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है, जिससे व्यापारियों को राहत मिलेगी।
  • LRS (Education/Medical Remittance) पढ़ाई या इलाज के लिए विदेश पैसे भेजते हैं (₹10 लाख से अधिक), तो अब 5% की जगह सिर्फ 2% टीसीएस देना होगा,,।

Overseas Tour Package

  • Overseas tour packages पर TCS अब 2% कर दिया गया है तथा ₹10 लाख की सीमा समाप्त कर दी गई है।

प्रत्यक्ष कर (Income Tax)

  • STT (Securities Transaction Tax) में वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से Equity Futures पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05%, Equity Options पर 0.10% से 0.15% तथा Options Exercise पर 0.125% से 0.15% कर दिया गया है, जिससे derivatives trading की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
  • Buyback Taxation में बदलाव 1अप्रैल 2026 से Buyback पर deemed dividend की जगह capital gains के रूप में कर लगाया जाएगा, जिसमें केवल वास्तविक लाभ (sale consideration minus cost) पर LTCG @12.5% (₹1.25 लाख तक छूट) या STCG @20% लागू होगा, तथा promoters पर उच्च दरें लागू हो सकती हैं।

करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे इन परिवर्तनों के अनुसार अपने accounting system, invoicing एवं tax planning को समय पर अपडेट करें, जिससे ब्याज, दंड एवं कर जोखिम से बचा जा सके।

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